Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
जग्मुर्दिनानि मासाश्च वर्षाण्यथ तयोस्तदा ।
क्रमाद्वावपि संयातौ जरां श्वभ्रद्रुमाविव ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उसी अवस्था में क्रमश: उनके दिन, मास और वर्ष
बीतते चले और वे दोनों, गड में उत्पन्न दो वृक्षों की नाई, बूढापे को प्राप्त हुए