Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
विरक्तौ विपिने कालं क्षेपयामासतुर्द्विजौ ।
वियूथाविव सारङ्गावनास्थामागतौ पराम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
घर, खेत, धन, आदि पदार्थो में अत्यन्त
विरक्ति को प्राप्त हुए वे दोनों ब्राह्मण, झुण्ड से अलग हुए दो मृगो की नाई, अलग अलग होकर जंगल
मँ अपना-अपना कालक्षेप करते थे