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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अप्राप्तविमलज्ञानौ चिराज्जर्जरतापसौ । तावेकदा संघटिताविदमन्योन्यमूचतुः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

बहुत समय बीत जाने पर एक समय प्रारब्धवश से कुछ समय बिछुड़े हुए वे दोनों जर्जर तपस्वी, जिन्हे विशुद्ध ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ था, एक दूसरे से फिर मिल गये ओर परस्पर यह कहने लगे