Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तदेव राघव श्रुत्वा परमं बोधकारणम् ।
अनेनैव विबोधेन भव लब्धास्पदः स्फुटम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, उस वर्णन किये गये
संवादरूपी उत्तम बोध-हेतु का श्रवण कर किया गया निश्चय ही बोध के लिए पर्याप्त हे । अतः इसी
सुरघु ओर परिघ के संवाद के श्रवण से जनित निश्चयात्मक ज्ञान से आप प्रत्यक्ष-रीति से प्राप्त पद हो
जाइये । क्योकि परमपद की प्राप्ति के लिए उतना सुप्रतिष्ठित बोध ही पर्याप्त है