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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

समाहिता नित्यतृप्ता यथाभूतार्थदर्शिनी । साधो समाधिशब्देन परा प्रज्ञोच्यते बुधैः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, चुपचाप बैठे रहना समाधि नहीं कहलाता, किन्तु समस्त आशारूप तृणों के लिए अग्निरूप जो आत्मतत्त्व का अपरोक्ष साक्षात्कार है, वही समाधि कहलाता है, क्योकि सम्यक्‌ आधानम्‌समाधिः“ सम्यक्‌ यानी समस्त ईच्छित विषयों का समूल बाध से पारमार्थिक स्वरूप में चित्त का जो आधान अवस्थान है, वह समाधि हे यों समाधि शब्द की व्युत्पत्ति हे यह भाव है ।।८॥ महात्मन्‌, मनीषी लोग समाधि शब्द का एकाग्र, सदासर्वदा, तृप्त, सत्य अर्थ का ग्रहणकरने वाली परा प्रज्ञा ही (अबाधित आत्मा का अपरोक्ष साक्षात्कारात्मक विज्ञान) अर्थ कहते हैं