Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अक्षुब्धा निरहंकारा द्वन्द्वेष्वननुपातिनी ।
प्रोक्ता समाधिशब्देन मेरोः स्थिरतराकृतिः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उसीका फलतः वर्णन करते है।
क्षोभ से रहित, अहंकार से शून्य, सुखदुःख आदि द्रन्दरो मे न गिरनेवाली ओर सुमेरु से भी
अधिक स्थिर आकारवाली प्रज्ञा समाधि शब्द से कही गई है