Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verses 7–8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, verses 7–8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
बद्धपद्मासनस्यापि कृतब्रह्माञ्जलेरपि ।
अविश्रान्तस्वभावस्य कः समाधिः कथं च वा ॥ ७ ॥
तत्त्वावबोधो भगवन्सर्वाशातृणपावकः ।
प्रोक्तः समाधिशब्देन नतु तूष्णीमवस्थितिः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि आप मुझे अज्ञानी मानते हैं, तो भी समाधि का उपदेश अयुक्त है ऐसा कहते हैं ।
जिसका अन्तःकरण परमशान्तिरूपी विशुद्धता को प्राप्त नहीं हुआ है, ऐसा पुरुष चाहे पद्मासन
लगावे चाहे परब्रह्म को हाथ जोड़े तो भी उसको किसी भी उपाय से किसी तरह की समाधि नहीं लग
सकती, क्योंकि जहाँ चित्त का लगाना है उसको वह जानता ही नहीं, यह भाव है