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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अथैतां पावनीं दृष्टिं भावयित्वाप्युदाहरन् । नित्यमेकसमाधानो भव भूषितभूतलः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, आपने समस्त भूमण्डल को सुशोभित किया हे । अब आप इस परम पवित्र दृष्टि को बार-बार परिशीलन के द्वारा अत्यन्त दृढ़ बनाइये, दूसरों को उसका उपदेश भी दीजिये ओर सदा सर्वदा एक ब्रह्म की समाधि में ही तत्पर हो जाइये