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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

विवेकावस्थया चेतस्तथैवायाति निर्वृतिम् । पतच्छ्वभ्रे दृढतृणप्रचयालम्बनादिव ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे कुएँ में गिर रहे प्राणी को मजबूत तृणसमुदाय के अवलम्बन से विश्रान्ति-सुख मिलता है, वैसे ही मोहरूपी गहरे कुएँ मे गिर रहे मन को सुरघु के प्रकरण में दर्शाई गई विवेकावस्था से विश्रान्ति सुख मिलता है