Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
आपातरमणीयेषु वर्तेतात्यन्तवैरिषु ।
कच्चिद्विषयसर्पेषु सविरागं मनस्तव ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे जितेन्द्रिय, ऊपर-ऊपर
से रमणीय दिखाई देनेवाले, पर असलियत में आत्मतत्त्व में भारी प्रतिबन्धक होने के कारण महान् वैरी
इन विषयरूपी सर्पो मेँ आपका अन्तःकरण वैराग्य धारण करता तो है न ?