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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

आधिव्याधिविहीनेयं कच्चित्कायलता तव । फलं फलति पुण्यार्थं यदिहामुत्र चोदितम् ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं से रहित यह आपकी देहरूपी लता एेहिक फल के साधनरूप से विहित का शरीरी आदि और पारलौकिक फल के साधन रूप से विहित ज्योतिष्टोम आदि क्रियाओं से होनेवाली पुण्यरूपी जो फल है, उनको करती तो हैं न ?