Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
एकदा तस्य सदनं हेमचूडमहीपतेः ।
प्राप रत्नविनिर्माणं मेरोः श्रृङ्गमिवापरम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय यत्र-तत्र विचर रहे राजर्षि पर्णाद उस स्वर्णजट नामक, देश के
अधिपति राजा सुरघु के सदन में (निवास स्थान में) प्राप्त हुआ जो कि रत्नों से विनिर्मित तथा सुमेरूपर्वत
के दूसरे शिखर के समान ऊँचा था