Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
विजहार यथाकामं त्रिलोकीमठिकामिमाम् ।
सिद्धसाध्यैः समं साधो सहंसालिरिवाज्जिनीम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे हंसों के साथ भ्रमर कमलिनी
में विहार करते हैं वैसे ही यहाँ जिर्ण पर्णाद अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी समय सिद्ध (तत्त्वज्ञान पा
चुकनेवाले) तथा साध्य (तत्त्वज्ञान की इच्छावाले) मुनिवरो से परिवृत होकर इस त्रिलोकीरूपी मठिका
में विहार करता था