Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verses 18–19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, verses 18–19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 18,19
संस्कृत श्लोक
ततो वर्षसहस्रेण तपसा दारुणात्मना ।
प्रापदभ्यासवशतो ज्ञानमात्मप्रसादजम् ॥ १८ ॥
बभूव विगतद्वन्द्वो निराशः शान्तमानसः ।
नीरागो निरनुक्रोशो जीवन्मुक्तः प्रबुद्धधीः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर एक
हजार वर्ष की दारूण तपश्चर्या से अभ्यासवश अन्तःकरण की परमशुद्धि तथा ईश्वर के अनुग्रह से
जनित आत्मज्ञान उसने प्राप्त किया । वह द्रन्द्रो से परे हो गया था, उसकी समस्त विषयाभिलाषाएँ
निकल चुकी थी,उसका अन्तःकरण प्रसन्न था,उसका विषयराग हट गया था, वह आक्षेपों से वर्जित
था तथा जीवन्मुक्त एवं प्रबुद्ध-मति था