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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

विवेश परमाद्यन्तकारणं कारणेश्वरम् । प्रज्ञया सरितां वारि परिपूर्णमिवाम्बुधिम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे नदियों का जल दो किनारों से पार होते ही पानी परिच्छिन्नता का परित्याग कर परिपूर्ण यानी परिच्छिन्नता से रहित असीम समुद्र में प्रविष्ट हो जाता है, वैसे ही वह राजा ब्रह्म साक्षात्कारात्मक वृत्ति की सामर्थ्य से (जन्म आदि के प्रतिबीजभूत अविद्यारूपी आवरण का तिरोधान हो जाने के कारण) समस्त हिरण्यागर्भादि कारणों के नियन्ता तथा सृष्टि ओर प्रलय के हेतु परब्रह्म परमात्मा में प्रविष्ट हो गया