Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अधिगतविमलैकरूपतेजा विजनदशां समुपेत्य शान्तशोकः ।
अलमभवदसौ परस्वरूपं घटखमिवाम्बरसंयुतं महात्मा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस परम पद में प्रवेश कर सुरघु किस प्रकार का हुआ, इसे कहते हैं।
जैसे घटाकाश घट के फूट जाने पर महाकाश के साथ एकीभूत हो जाता है वैसे ही यह महात्मा
सुरघु जिसने कि ब्रह्मसाक्षात्कारात्मक प्रज्ञा से विमल आनन्दैकरस तथा स्वप्रकाशात्मक तेजको
स्वात्मरूप से प्राप्त कर लिया था और जन्म आदि विकारों से रहित अवस्था को प्राप्त कर लेने के
कारण जिसके समस्त शोक शान्त हो चुके थे-पूर्णरूप से पर स्वरूप ही हो गया यानी परमात्मा के साथ
एकीभूत हो गया । यही इसका निर्वाण था, यह भाव है