Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
किं सुखं किं नु वा दुःखं सर्वं ब्रह्मेदमाततम् ।
अहमासं मुधा मूढो दिष्ट्या मूढोऽस्म्यहं स्थितः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्ममोह के निकल जाने पर सुख और दु:ख की प्राप्ति भी नहीं होती, ऐसा कहते हैं।
क्या सुख है ? और क्या दुःख है ? यानी काल्पनिक सुख और दुःख दोनों ही मिथ्या हे । यह सब
कुछ व्यापक परब्रह्म स्वरूप ही हे । पहले मैं व्यर्थ ही मूढ बन कर बैठा था, अब भाग्यवश अपने वास्तव
स्वरूप में अवस्थित हुआ हूँ