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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

किमस्मिन्नेवमालोके शोच्यते किं विमुह्यते । किं प्रेक्ष्यते किं क्रियते स्थीयते वाथ गम्यते ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसका आनन्देकरस पूर्वस्वभाव से अनुभव होता है, ऐसा ब्रह्मरूप आलोक में क्या शोक है, क्या मोह हे, क्या प्रेक्षण हे, क्या कार्य है, क्या अवस्थान है और क्या गमन है अर्थात्‌ शोक आदि की तनिक भी संभावना नहीं हे