Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
मन्निग्रहानुग्रहजा मद्भृत्यवपुषि स्थिताः ।
कषन्ति मामलं चिन्ता गजं हरिनखा इव ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सिंह के
नख हाथी को उत्पीडित करते हैं, वैसे ही मेरे शत्रु, मित्र आदि के शरीरों के विषय में मेरे द्वारा किये गये
निग्रह और अनुग्रह से जनित चिन्ताएँ मुझे अत्यन्त उत्पीडित कर रही हैं