Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
तद्यथा समतोदेति सूर्यांशुरिव सर्वदा ।
मतौ मम मुने नान्या तथा करुणया कुरु ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवान्, इसलिए
सूर्य की किरणों के समान मेरी बुद्धि में सर्वदा सम दृष्टि का उदय जैसे हो और विषमदृष्टि का उदय जैसे
न हो, वैसा कृपापूर्वक कीजिये