Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 62
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
कर्मणास्ति न तस्यार्थो नार्थस्तस्यास्त्यकर्मणा ।
यथास्वभावावगमात्स आत्मन्येव संस्थितः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी का न तो कर्म से कोई प्रयोजन है और न कर्मत्याग से ही उसका कोई
प्रयोजन है। अपने यथार्थ स्वरूप के ज्ञान से वह आत्मा में ही स्थित है