Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
यत्करोति यदश्नाति यद्ददाति जुहोति वा ।
न तज्ज्ञस्य न तत्र ज्ञो मा करोतु करोतु वा ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
पाप के फल की तरह पुण्य का फल भी ज्ञानी को नहीं होता, यों उसके सब कर्मो की क्षति हो जाती
है, ऐसा कहते हैं।
ज्ञानी जो कुछ काम करता है, जो भोजन करता है, जो देता है अथवा जो यज्ञ में हवन आदि करता
है वह ज्ञानी का नहीं है न उनमें ज्ञानी निरत ही रहता है । वह चाहे करे, चाहे न करे उनके फल से वह
लिप्त नहीं होता है