Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
बहिष्ठेनान्तरं बाह्यमन्तःस्थेनान्तरस्थितम् ।
यथाविदितमात्मायं स्वचित्तमनुपश्यति ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव यह आत्मा अपने चित्त को ही पूर्वपूर्वं अनुभव
के अनुसार बहिर्मुख चक्षु आदि द्वारा बाह्य (जगदाकारः) देखता है । अन्दर स्थित जाग्रत्-वासना
आदि से हृदय में स्थित स्वप्न को देखता है