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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

दिनकरकरशुष्कं विप्रकंकालकं त ज्झटिति मुकुटकोटौ खड्गखट्वाङ्गमध्ये । सकलविबुधवन्द्या खिंखिनी देवदेवी निशि नवतरवृत्ताकान्तकान्तिं चकार ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

उन माताओं में से समस्त पण्डितो की एवं देवताओं की भी पूज्य रात्रि के समय नूतन-नूतन आभूषणों के वैचित्र्य से एक-से-एक सुन्दर नये-नये लास्यादि वृत्तान्तवाली चामुण्डा नाम की माता ने सूर्य की किरणों से सूखे हुए उस ब्राह्मण के शव को अति शीघ्र ही उद्यत तलवार और खट्वांग के (शस्त्रविशेष के) मध्य मेँ स्थित अपने मुकुट का भूषण बना दिया