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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

अथ बहुतरकालेनैतदद्रेर्भुवं तामुपययुरगकन्याऽसंयुता मातरः खात् । अभिमतफलसिद्ध्यौ संयुता एव सर्वा अनलमिव शिखानां पङ्क्तयः पिङ्गकेश्यः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसके अनन्तर चिरकाल बाद उस पर्वतभूमि पर, जहाँ उद्दालक का शव पडा हुआ था, पर्वत के न्याय के साथ पीले केशोंवाली ब्राह्मी आदि सब माताएँ किसी भक्त की अभिमत फलसिद्धि के लिए इस प्रकार आई जिस प्रकार पीली ज्वालाओं की पंक्तियाँ अग्नि के पास आती हैं