Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
देहमन्यतया दृष्ट्वा त्यक्त्वा विषयवासनाम् ।
विनाशमुररीकृत्य मनो जयति वीरवत् ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वीर पुरुष युद्धभूमि में स्थित अपने शरीर को स्वर्गगामी अपने से
भिन्न देखकर और उस शरीर से सम्बन्ध रखनेवाले घर, खेत, धन आदि की वासना का त्यागकर अपने
नाश तक को स्वीकार करके ब्रह्मलोक को जीतता हे वैसे ही चित्त देह को अपने से भिन्न जानकर,
विषय-वासना का त्यागकर और अपने विनाश तक को स्वीकार कर ब्रह्मलोक पर विजय पाता हे यानी
मोक्षविश्रान्ति को प्राप्त होता है