Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
परमात्मानले क्षिप्तं संवृत्त्यावयवं स्वयम् ।
दग्ध्वात्मानमलं चित्तं शुद्धतामेति शाश्वतीम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त अपने-आप बाहर प्रवृत्त हुए अपने अवयवरूप इन्द्रिय आदि का संवरण कर
तत्वबोध द्वारा परामात्मरूप अग्नि में प्रक्षिप्त होकर चित्त-स्वरूप को जला कर अत्यन्त शाश्वत परम
शुद्धि को प्राप्त होता है