Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
दिष्ट्येदानीं परिज्ञातो मयैवाज्ञानतस्करः ।
पुनर्न संश्रयाम्येनं स्वरूपार्थापहारिणम् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े सौभाग्य का विषय है कि अब मैं अज्ञानरूपी चोर को पहचान गया हूँ।
अपने वास्तविक स्वरूपरूपी धन को हरनेवाले इसको फिर नहीं अपनाऊँगा