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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 48

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

निर्दुःखो दुःखयोग्यस्य नाहं तस्य न चैष मे । कश्चिद्भवति शैलस्य तत्स्थ एव यथाम्बुदः ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

परस्पर विरोधी स्वभाववाले हम दोनों का कोई सम्बन्ध भी नहीं है, एकता की बातें तो दूर रही, इस अभिप्राय से कहते हैं। जैसे पर्वत पर स्थित मेघ पर्वत का कोई नहीं होता वैसे ही दुःखरहित मैं दुःख के भाजन उसका सम्बन्धी नहीं हूँ और वह मेरा सम्बन्धी नहीं है