Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
समस्तभूतदुष्प्रापामेकदा प्राप कन्दराम् ।
संशान्तसर्वसंचारां मुनिर्मोक्षदशामिव ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
एक समय वे सब प्राणियों
से दुष्प्राप्य एवं सबके संचार से रहित कन्दरा में ऐसे ही पहुँचे जैसे मुनि सबके संचार से रहित मोक्षदशा
को प्राप्त होता हे