Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
अपर्याकुलितां वातैरप्राप्तमृगपक्षिणीम् ।
अदृष्टां देवगन्धर्वैः परमाकाशशोभनाम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस कन्दरा में वायु द्वारा विक्षेप-व्याकुलता न थी, कोई मृग-पक्षी वहाँ कभी
नहीं पहुँचे थे, देवता ओर गन्धर्वो तक को उसका दर्शन कभी नहीं मिला था ओर वह परमाकाश के
(ब्रह्म के) समान शोभायमान थी