Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
अथ पर्याकुलमना विजहार मुनिर्गिरौ ।
प्रत्यहं दिवसाधीशो महामेराविवैककः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर व्याकुल मनवाले मुनि जैसे सूर्य प्रतिदिन
महामेरु में अकेले ही भ्रमण करते हैं वैसे ही पर्वत पर भ्रमण करते थे