Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
जाग्रत्येव हि संसुप्तां भावयन्सुस्थिरां स्थितिम् ।
सर्वमस्मीति संचिन्त्य सत्तैकात्मवपुर्भव ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
जाग्रत् अवस्था में ही सुषुप्त की-सी निर्विकल्प तथा अत्यन्त स्थिर स्थिति की भावना कर रहे
आप 'मैं सब हूँ” यह विचार करेक मात्र सत्तारूप होइये