Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

नानाऽनानादशामुक्तो युक्तो मुक्ततया समे । समग्रकलनादीपः स्वचिन्मात्रपरो भव ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

नाना दशा (जाग्रत्‌ और स्वप्नदशा) ओर अनानादशा (सुषुप्ति दशा) से मुक्त अथवा सृष्टि ओर प्रलय दशा से मुक्त, मुक्तरूप से सम में (ब्रह्म मे) संलग्न तथा सबकी नाना बुद्धिवृत्तियों के दीप के तुल्य प्रकाशक आप स्वचिन्मात्रपरायण होइये