Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
शुभाशुभस्वसंकेतसंशान्ताशाविषूचिकः ।
नष्टेष्टानिष्टदृष्टिस्त्वं संवित्सारपरो भव ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने संकल्प से किये गये शुभ ओर
अशुभरूप संकेतों मेँ जिनकी आशारूपी विषूचिका शान्त हो गई हे, अतएव जिनकी यह इष्ट हे ओर
यह अनिष्ट है, यह दृष्टि नष्ट हो चुकी है ऐसे आप संवित् रूपी सार-पदार्थ में संलग्न होइये