Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
स्वानुभूतानि दुःखानि स्वात्मैव त्यक्तुमिच्छति ।
तेनात्मैवात्मविज्ञाने हेतुरेकः परः स्मृतः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व श्लोक में उक्त मुख्य कारणता को स्पष्ट करते हैँ ।
चूँकि अपना आत्मा ही अपने से अनुभूतदृश्य वस्तुएँ दुःख ही हैं, यों विवेकसे उन्हें छोड़ना
चाहता है, अतएव अपने आत्मा के अवलोकन में दृश्य प्रतिकूल स्वभाववाली आत्मा ही स्वयं एक
मुख्य कारण कहा गया है । यदि आत्मा स्वयं भी असुख जडस्वभाव होता, तो दृश्य के प्रतिकूल न
होता, यह भाव है