Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तस्माद्राघव संत्यज्य तीर्थदानतपःक्रियाः ।
श्रेयसे परमायान्तश्चित्तमेव वशं कुरु ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे राघव, तीर्थस्नान, दान, तपस्या आदि कर्मो का मार्ग छोडकर परम कल्याण के
लिए भीतरी चित्त को ही वश में कीजिये