Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चित्तान्तरेव संसारः कुम्भान्तः कुम्भखं यथा ।
चित्तनाशे न संसारः कुम्भनाशे न कुम्भखम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे घड़े के अन्दर घटाकाश रहता हे वैसे ही चित्तके
अन्दर ही संसार हे । जैसे घड़े के नष्ट होने पर घटाकाश नहीं रहता वैसे ही चित्त का नाश होने पर
संसार नहीं रहता