Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विचारेण परिज्ञातवस्तुनोऽस्य जनस्य धीः ।
सर्वानधःकरोत्याधीन्सौम्याम्भ इव वालुकाः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार से जिसने ज्ञातव्य वस्तु को जान लिया, उस पुरुष की बुद्धि
जैसे स्थिर जल रेत के कणों को दबा देता है वैसे ही सब मानसिक चिन्ताओं को दबा देती है