Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इति निगदितवान्स पद्मनाभो भुवनगतापसवृन्दपूज्यमानः ।
विबुधमुनिगणैः पवित्रहस्तैर्वृत उदधिं निजमास्पदं जगाम ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे वत्स, तीनों लोकों के तपस्वियों से पूजित एवं भगवान् के चरण स्पर्शादि
से पवित्र हाथोंवालो पंडित और मुनियों के समूह से धिरे हुए पद्मनाभ भगवान्, इस प्रकार कह कर अपने
स्थान क्षीर सागर को चले गये