Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
यत्रानन्तजगज्जालं संस्थितं तेन तेजसा ।
श्वपचत्वं प्रकटितं यदि तद्विस्मयोऽत्र किम् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस चित्त में सदधिष्ठान के अवलम्बन से अनन्त
जगत्-रूपी जाल फसा है उस चित्त में यदि चाण्डालत्व प्रकट हो गया, तो इसमें क्या आश्चर्य है ?
अर्थात् कुछ आश्चर्य नहीं है