Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
त्यक्तावनेर्विटपिनो भूयः पत्राणि नो यथा ।
निर्वासनस्य जीवस्य पुनर्जन्मादि नो तथा ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पृथिवी से उखाड़े गये वृक्ष में पत्ते आदि नहीं रहते वैसे ही वासना
रहित जीव के जन्म आदि नहीं होते हैं