Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
लुठितं श्वपचागारे पुनर्विस्मयमाययौ ।
गाधेर्मनो हि नायाति तृप्तिमाश्चर्यदर्शने ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, चाण्डालो के घर में चिरकाल से आसक्त गाधि का मन फिर
आश्चर्य में पड गया, क्योंकि अद्भुत दृश्य को देखने से गाधि का मन तृप्त नहीं हुआ
सर्ग सन्दर्भ
सैंतालीसवाँ सर्ग समाप्त अड़तालीसवाँ सर्ग॑ गाधि का कीरनगर में जाकर आश्चर्यपूर्वक देखकर तपस्या से भगवान् विष्णु को प्रसन्न करना तथा विष्णु का यह सब माया है, यह कहना |