Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 66
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
अव्याहतं सकलभूतमुखादथैतदाकर्ण्य सम्यगवलोक्य यथानुभूतम् ।
गाधिः शशाङ्कमलवद्हृदयेऽधिरूढं गूढाकृतिः परमविस्मयमाजगाम ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
सब प्राणियों के मुंह से सत्य वचन सुनकर स्वयं भी अबाधित
प्रत्यभिज्ञा से जैसे अनुभूत हुआ था वैसे देख कर लज्जा से गूढ आकृतिवाले गाधि चन्द्रमाके कलंक की
नाई अपने हृदय में उत्पन्न हुए परम विस्मय को प्राप्त हुए