Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्रावलोकयामास स्थानानि सदनानि च ।
कल्पक्षोभविवृत्तानि जगन्तीवाम्बुजोद्भवः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ गाधि ने
प्रलयकाल के उपद्रव से नष्ट हुए त्रिलोक को जिस तरह ब्रह्मा देखते हैं उसी तरह बहुत से स्थानो ओर
घरों को देखा