Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
कीरेषु श्वपचो राज्यं वर्षाण्यष्टौ चकार ह ।
आर्यवृत्तमशेषेण तावत्कालं बभार ह ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
कीरदेश में उस चाण्डाल ने आठ वर्ष तक राज्य किया | तब
तक उसने दया, दाक्षिण्य, शौचादि सद्वृत्तियों को पूर्णरूप से धारण किया