Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यदृच्छयैकदाथासावतिष्ठत्त्यक्तभूषणः ।
अतमस्तारकेन्द्वर्कतेजोऽम्भोदमिवाम्बरम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर एक समय
वह अपनी इच्छा से भूषणरहित अतएव अन्धकार सा तारे चन्द्रमा, सूर्य के तेज ओर मेघो से रहित
आकाश के तुल्य स्थित था