Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
क्रियते माधवादीनां प्रणयप्रार्थना स्वयम् ।
तथैव क्रियते कस्मान्न स्वकस्यैव चेतसः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे विष्णु आदि देवताओं की विनय प्रार्थना
स्वयं की जाती है, वैसे ही अपने ही चित्त की प्रणय प्रार्थना क्यों नहीं की जाती है ?