Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
विचारोपशमोपेतं चित्तमाराधयात्मनः ।
तस्मिन्सिद्धे भवान्सिद्धो नो चेत्त्वं वनगर्दभः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार ओर उपशम से युक्त
अपने चित्त को प्रसन्न करो । उसके प्रसन्न होने पर आप परम पुरुषार्थरूप सिद्धिता को प्राप्त हो
जाओगे । नहीं तो आप जंगली गदहे के सदृश हो