Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
सर्वस्यैव जनस्यास्य विष्णुरभ्यन्तरे स्थितः ।
तं परित्यज्य ये यान्ति बहिर्विष्णुं नराधमाः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
इन सभी लोगों
के अन्दर भगवान् विष्णु स्थित हैं। उनका परित्याग करके जो बाह्य आराधना करते हैं, वे नराधम हैं। भाव
यह कि मनोभक्ति ही मुख्य विष्णु भक्ति है बाह्यभक्ति मुख्य नहीं है